Abhi Sharma
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बाजार की अस्थिरता एवं उसकी गलत मान्यताएं|

आगामी आर्थिक असुरक्षा और अस्पष्टता के कारण बाज़ार अशांत उतार-चढ़ावों भरा रहा है| जहाँ वित्तीय असुरक्षा इसके मुख्य कारणों में से एक हो सकती है, वहीं प्राकृतिक आपदा, तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, दीवानी अथवा युद्ध जैसी स्थितियाँ इसके अन्य कारक हैं| यह अस्थिर स्थितियाँ बाजार में निवेशकों और व्यापारियों के लिए बेहद चिंताजनक हैं क्यूंकि वह डरते हैं की कहीं बाज़ार में एक सरल सुधार के कारण उन्हें अपनी मेहनत की कमाई खोनी न पड़े|

कई निवेशक अस्थिरता को प्रमुख समस्या मानते हैं| मगर कई विश्लेषकों की राय में बढ़ी हुई अस्थिरता एक संभावित सुधार के संकेत हैं| अनुभवी व्यवसायी बाज़ार पर बारीक नज़र रखते हैं  एवं उसका अनुसरण करते हैं एवं वह शेयरों और सूचकांक विकल्पों में उस समय लिप्त होते हैं जब बाज़ार में उछाल की संभावनाएं हों| उसी प्रकार मंदी के दौरान, निवेशक मानते हैं कि बाज़ार चढ़ा रहेगा जिसके फलस्वरूप बाज़ार में बिकवाली की स्थिति बन सकती है क्यूंकि सट्टेबाज बाज़ार सम्बन्धी अपनी थोड़ी बहुत या न के बराबर जानकारी के चलते आमतौर पर अपनी स्थिति को और संपत्ति को ऊंची कीमतों पर बेचने की कोशिश करते हैं| जिसके परिणाम शेयरों का उच्च मूल्यांकन और दुष्चक्र के रूप में सामने आते हैं एवं यह बाजार के लिए एक अत्यधिक अस्थिर स्थिति बनाते हैं|

कुछ लोग अवसरनुसार बाज़ार में  निवेश का प्रयास करते हैं और यह विचार करते हुए बाज़ार में आते और जाते हैं कि वह बाज़ार में उछाल के समय निवेश करेंगे तथा मंदी में किसी नुकसान से पहले निकास करेंगे| मगर यह असंभव है और वास्तविकता ठीक इसके उलट है अकसर इस प्रकार के निवेशकों का शेयरों पर निवेश मंदी के समय अधिक और सुधार के समय कम रह जाता है|  यह भय अंततः निवेशक की बाजार की अस्थिर स्थितियों के दौरान मुनाफा कमाने की या घाटा कम करने की संभावनाओं को नष्ट कर देता है| निवेशकों की एक अन्य प्रमुख धारणा है कि हाल के दिनों में बाज़ार की समग्र अस्थिरता बढ़ी है, लेकिन उनको यह जान कर आश्चर्य होगा कि ज़्यादातर अर्थव्यवस्थाओं में शेयर बाजारों में लचीलापन बना रहा है और जब अधिक समयांतराल पर औसत लिया गया तो औसतों की भी लगभग समान स्थिति बनी रही| इसमें कोई शक नहीं है कि अंतर्दिवसीय बाजारों में और अधिक अस्थिरता आयी है जिसके चलते निवेशक शेयर बाज़ार की अस्थिरता के प्रति सावधान हो गए हैं|

नियमित आधार पर निवेश करने के अपने ही फायदे हैं और औसत का नियम बाज़ार की अस्थिरता के चलते उत्पन्न हुईं घटनाओं का ध्यान रखता है| इसके विपरीत आवर्ती निवेश न तो लाभ की गारंटी देता है और न ही घटते हुए बाज़ार में नुकसान को रोकता है| इसके अलावा निवेशकों को उनके द्वारा किए गए निवेश की समीक्षा करनी होती है और यह सुनिश्चित करना होता है कि निवेश में काफी विविधता है एवं व्यापक विविधता के शायरों, बांड, कोमोडिटी और अचल संपत्ति में पर्याप्त अनुभव है और अस्थिर बाजार की गतिविधियों को मात देने का माद्दा है| हमें यह समझना चाहिये कि सबसे अधिक सफल  निवेशक भी यह मानते हैं कि अस्थिर बाजारों में निवेश के लिए ज्योतिषी की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन ज़्यादातर परिस्थितियों में, बाजार की जानकारी और एक हद तक पालन किया जा सकने वाली एक ठोस निवेश योजना की आवश्यकता होती है|